दीपावली – दीपों का त्योहार, पूजा सामग्री व विधि

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Shubh-Diwali

Shubh-Diwali

दीपावली दीपों का त्योहार है। दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है, अपने मित्रों और परिवारजन में मिठाई और उपहार बाँटे जाते है साथ ही शाम को जमके आतिशबाजी की जाती है। दीपावली के लिए कई सप्ताह पूर्व ही तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ़ सुथरा कर सजाते हैं।

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इस त्योहार के पीछे कई सारी सांस्कृतिक आस्था है जो भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अपने राज्य के आगमन पर मनाया जाता है। इस दिन अयोध्यावासीयों ने भगवान राम के आने पर घी के दीयों से रोशनी कर उनका स्वागत किया। दीपावली के पर्व पर धन की देवी महालक्ष्मी के साथ विघ्न-विनाशक श्री गणेश जी की पूजा-आराधना की जाती है।

पूजा सामग्री :

लाल वस्त्र, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), कलावा, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, पांच सुपारी, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश के लिए आम का पल्लव, चौकी, समिधा, फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी , अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली, कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन इत्यादि।

पूजा की विधि :

सर्वप्रथम माँ लक्ष्मी व गणेशजी की प्रतिमाओं को चौकी पर रखें। कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में लपेट कर उसे कलश पर रखें। एक दीपक को घी और दूसरें को तेल से भर कर और एक दीपक को चौकी के दाईं ओर और दूसरें को लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं के चरणों में रखें। लक्ष्मी-गणेश के प्रतिमाओं से सुसज्जित चौकी के समक्ष एक और चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। उस लाल वस्त्र पर चावल से नवग्रह बनाएं। साथ ही रोली से स्वास्तिक एवं ओम का चिह्न भी बनाएं। माता की स्तुति और पूजा के बाद दीप दान भी अवश्य करें।

गोवर्धन पूजा

दीपावली से ठीक अगला दिन गोवर्धन पूजा के लिये होता है जिसमें भगवान कृष्ण की अराधना की जाती है। लोग गायों के गोबर से अपनी दहलीज पर गोवर्धन बनाकर पूजा करते है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर अचानक आयी वर्षा से गोकुल के लोगों को बारिश के देवता इन्द्र से बचाया था।

भैया दूज

गोवर्धन पूजा के बाद का दिन हमलोग भैया दूज के नाम से जानते है। ये भाई-बहनों का त्योहार होता है। भैया दूज भारत का एक सबसे प्रमुख और महान त्योहार है जब बहने अपने प्रिय भाइयों के लिए लंबे समय तक जीवित और समृद्ध जीवन प्राप्त करने के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। भाई-बहन के परस्पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक हैं, भैया दूज।

दुआ है कि सभी के सपने पूरे हों और आपको भरपूर स्नेह, भाग्य और रोशनी मिले। साथ ही कृपया सुरक्षित रहें और खुश रहें। उम्मीद है कि यह साल शोर और प्रदूषण से मुक्त रहेगा। बजाए इसके मस्ती करें और प्रेम फैलाएं। इस दिवाली पर अपने अमर जवानों की याद और सम्मान में देश को रोशन करें और उनके परिवार के लिए प्रार्थना करें।